काश यह मंदी ना होती तो मैं तेरे लीये हिरा लाता.
आजकल तो जब भी ओफीस जाता हूं डर सा रहता है मन में.... पता नहीं कब बाहर का रास्ता दीखादें.
यार ऐसे माहौल में तो गलफ्रेन्ड रखना भी पाप है,.
चलो कोइ नहीं. मैं तुम्हारे लीये प्यारा सा कोफी मग तो ले ही सकता हूं ना...
मुझे आज भी याद है हमारी वोह मुलाकातें.. जब रोज हम CCD मे मीला करते थे.
तुम्हे कोफी कीतनी पसंद है... अमममममम ओह भुल गया.....
जब भी तुम मेरे दिये कप से कोफी पीओगी, मुजे लगेगा मुजे छु लीया....
और इस कप पर तो तुम्हारा नाम भी लीखा है...
आखीर वोह घडी आ ही गयी... मेरा गीफ्ट देख तुम फुलो सी खील गयी..
और में आंखे मुंद कर इंतजार कर रहा हुं की कब तुम आके मुजे लीपट जाओ..
ओह... ये क्या... मेरा सपनो सा कोफी मग दिवार से टकरा कर टूट गया हैं
उस पर लीखा तुम्हारा नाम बीखर गया..... साथ में मेरा दिल भी...
आज मुजे लग रहा है... काश में तुम्हारे लीये हिरा लाता....
काश में तुम्हारे लीये हिरा लाता....
Saturday, March 7, 2009
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9:14 AM
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