मैं जीत गई...

Thursday, August 20, 2009 at 4:47 AM

ओटो वाला चिल्ला रहा है, आज जल्दी आ गया कम्बख़त. क्या करुं..

जल्दी जल्दी कपड़े प्रेस कीए. अभी तो बाल भी सुखाने है, अरे, चहरे पर मोश्चराईञर भी लगाना रह गया... जल्दी से स्प्रे मारा ओर, आइने के सामने खडी मैं इठलाने लगी..

जैसे ही कुर्ता उठाया, ............

उई मां............. चिख़ निकल गई.. मोटी ताज़ी छिपकली ईठलाती हुई, मेरे सामने प्रकट हुई.. क्या करुं अब मैं ? सारे बदन मे सिरहन सी दौड़ गई... एकबार तो मैं उसकी साफ सी त्वचा को निहारने लगी. कितनी बेदाग थी.. कोनसी क्रिम लगाती होगी ? स्त्री सहज भाव उमड़े... उसकी त्वचा से उसकी उम्र का पता नहीं चल रहा था... हा हा हा..

एकदम से ओटो का होर्न बजा और मैं होश मे आयी. अब क्या करुं.. मरजाणी हिलने का नाम भी तो नहीं ले रही थी.. किसे बुलाउं ?

शायद मुज़े देख कर वोह भी, अचंभीत हो गइ थी. वोह मुज़े देख रही थी, और मैं उसे.. शायद उसे मुजसे प्यार हो गया... हा हा हा....

कोन भगाएगा उसे.? मुज़े देर हो रही थी. और वोह फुटेज खा रही थी. आखिरकार मैंने एक कदम उठाया, वोह जरा हिली. मैं पीछे हटी, वोह आगे बढी.. मैने उसे अनदेखा करनेका नाटक किया,

और जैसे मानो उसे यह बेरुखी बरदास्त ना हुइ और सरसराते हुए भाग निकली.

आह... सांस में सांस आई.... आखिरकार मेरी जीत हुई.....(?)

1 Responses to मैं जीत गई...

  1. आपके साहस की जितनी प्रंशसा की जाय कम है संघर्ष जारी रखिये

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